कल्ला जी राठौड़ [ VEER KALLA JI RATHOD ]

 


                                                              कल्ला जी राठौड़ 


👉इन्हें चार हाथों वाला देवता / शेषनाग का अवतार / चक्रवात युद्ध के धनी / केहर / कल्याण /कमधज / बालब्रह्मचारी / योगी आदि नामों से पुकारते हैं। 

👉इनका जन्म मारवाड़ के सामीयाना गाँव में पिता आससिंह राठौड़ दादा राव अचलाजी (मेड़ता शासक राव दूदाजी के पुत्र) के घर आश्विन शुक्ला अष्टमी वि.सं. 1601 (सन् 1544 ई.) को हुआ। 

👉इनकी बुआ - मीरां बाई, चाचा - जयमल, गुरू - भैरवनाथ, कुलदेवी - नागणेची थी।

 👉इनकी मृत्यु चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके 23 फरवरी, 1568 ई. में अकबर के विरूद्ध लड़ते हुये हुई

 👉इनकी छतरी भी चित्तौड़गढ़ दुर्ग में भैरव पोल पर है  

 👉तो इनकी सिद्ध पीठ 'रनेला / रन्देला' (बरोड़ा ग्राम पंचायत, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़) नामक स्थान पर है। 

 👉कल्लाजी राठौड़ का निवास स्थान हवेली कहलाता है। 

 👉कल्लाजी ने  पेमला डाकू को हराया। 

 👉सामलिया क्षेत्र (डूंगरपुर) | में इनकी काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है।







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