राणा कुंभा (Rana Kumbha)

 



                                                       राणा कुंभा (Rana Kumbha)

👉राणा कुंभा (Rana Kumbha) एक प्रमुख राजपूत राजा थे जो फिरोजा (Mewar) राज्य के सिंहासन पर राज्य करते थे। उनका जन्म सन् 1433 में हुआ था और मृत्यु सन् 1468 में हुई।

 👉राणा कुंभा में सामरिक योग्यता, कला और साहित्य में विशेष रूचि थी। उन्हें मेवाड़ के सबसे प्रमुख और महान शासकों में से एक माना जाता है।

 👉राणा कुंभा का असली नाम महाराणा कुंभाखान था, जो मेवाड़ी इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।

 👉वह महाराणा कुंभाखान जी के बेटे थे और उनके पिता की मृत्यु के बाद, वह राजगद्दी पर बैठे। उन्होंने मेवाड़ की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिनमें से सबसे प्रमुख था मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ किले का पुनर्निर्माण।

 👉राणा कुंभा के शासनकाल में मेवाड़ में कला, साहित्य और संस्कृति का विकास हुआ। उन्होंने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यों का आयोजन किया, जिनमें विशेष रूप से "राजस्थान रास" (Rajasthan Ras) नामक काव्य शामिल है।

 👉राणा कुंभा का महत्त्वपूर्ण योगदान मेवाड़ी वास्तुकला में भी रहा है। उन्होंने कई मंदिरों, किलों और पार्कों का निर्माण किया।

 👉उनका सबसे प्रसिद्ध कार्य में से एक, खंडहर में स्थित "कुंभालगढ़" (Kumbhalgarh) किला है, जिसे उन्होंने बनवाया था। कुंभालगढ़ किला मेवाड़ का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भी शामिल है।

 👉राणा कुंभा एक वीर और साहसी राजा थे, जिन्होंने अपने शासनकाल में मेवाड़ की सीमाओं को सुरक्षित रखा और राज्य की गरिमा को बढ़ाया।

 👉 उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र राणा सांगा (Rana Sanga) ने मेवाड़ का राजसत्ता संभाला।











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