बूँदी चित्रशैली



                                                                  बूँदी चित्रशैली


👉 बूँदी चित्रशैली का विकास राव शत्रुशाल (छत्रसाल) हाड़ा के काल में विशेष रूप से हुआ हैं।

👉बूंदी शैली के अन्तर्गत यहां स्थित चित्रशाला का निर्माण राव उम्मेदसिंह हाडा ने करवाया। जिसे भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहते हैं। 

👉प्रमुख चित्रकार – अहमद अली, सुर्जन, अहमदली, रामलाल, श्री किशन और साधुराम इस शैली के प्रमुख कलाकार हुए।

👉प्रकृति– आकाश में उमड़ते हुये काले बादल, बिजली की कौंध, घनघोर वर्षा, हरे भरे पेड़, चहकती चिड़िया, नाचते मयूर एवं कलाबाजी दिखाते वानर । 

👉इसलिए इसे पशु- पक्षियों की चित्रशैली भी कहा जाता हैं।

👉दीपक राग तथा भैरव रागिनी के चित्र राव रतन सिंह (1607-31) के समय में निर्मित हुए।

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